उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lag raha tha yahin kahin ho tum

लग रहा था यहीं कहीं हो तुम

لگ رہا تھا یہیں کہیں ہو تم

शायर: Aamir Azher5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लग रहा था यहीं कहीं हो तुम
काश होते मगर नहीं हो तुम

सिर्फ़ बारिश में वस्ल मुमकिन है
आसमाँ मैं हूँ और ज़मीं हो तुम

दूर से भी हो दिल-नशीं लेकिन
सामने किस क़दर हसीं हो तुम

कब से मुझ को नहीं मिले देखो
यार क्या ज़ेर-ए-आस्तीं हो तुम

जिस जगह था मैं फिर वहीं हूँ मैं
जिस जगह था मैं क्या वहीं हो तुम