उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lakhon dinon ke bojh tale gham-rasida log

लाखों दिनों के बोझ तले ग़म-रसीदा लोग

لاکھوں دنوں کے بوجھ تلے غم رسیدہ لوگ

शायर: Tahir Hanfi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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लाखों दिनों के बोझ तले ग़म-रसीदा लोग
अपनी तलाश में हैं रवाँ सर-बुरीदा लोग

धागे ख़ुशी के अपने बदन से लपेट कर
ज़ख़्मों की बस्तियों में रहे आब-दीदा लोग

बोहरान मेरे इस्म को दे कर चले गए
जो मेरे अह्द में थे कभी ना-शुनीदा लोग

इक अह्द के सफ़र में अना भी शरीक थी
लेकिन उसे समझ न सके बे-अक़ीदा लोग

वो मेरे ही ख़याल के रौशन निशान हैं
लफ़्ज़ों में जो बयान हुए ख़त-कशीदा लोग