उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lakh karta rahe tawaf-e-haram

लाख करता रहे तवाफ़-ए-हरम

لاکھ کرتا رہے طواف حرم

शायर: Ghalib Ahmad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लाख करता रहे तवाफ़-ए-हरम
दिल ब-दस्तूर है ख़ुद एक सनम

जिन रफ़ीक़ों के ग़म को अपनाया
वो भी आए बरा-ए-पुर्सिश-ए-ग़म

ज़ुल्मत-ए-शब की आँख का तारा
मेरा दिल जिस पे दिन के लाख सितम

रौशनी की रमक़ नहीं दिल में
तेरे माथे की चाँदनी की क़सम

मुंतशिर हो रहा है ज़ौक़-ए-नज़र
रिफ़अत-ए-आरज़ू कहाँ हैं हम