उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lakh biTha le koi pahre hum ko mohabbat karni hai

लाख बिठा ले कोई पहरे हम को मोहब्बत करनी है

لاکھ بٹھا لے کوئی پہرے ہم کو محبت کرنی ہے

शायर: Yawar Azeem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लाख बिठा ले कोई पहरे हम को मोहब्बत करनी है
हम तो धुन के पक्के ठहरे हम को मोहब्बत करनी है

पुल ता'मीर करेंगे कोई हम उन के और अपने बीच
सुन ऐ हिज्र के पानी गहरे हम को मोहब्बत करनी है

उस के क़ुर्ब की ठंडी छाँव ख़्वाब परिंदे शाम शजर
दूर निकल ग़म के दो-पहरे हम को मोहब्बत करनी है

हमें मु'आफ़ रखे ये दुनिया इन बे-कार की बातों से
हम अच्छे हैं गूँगे बहरे हम को मोहब्बत करनी है

अपनी आँखों की सुर्ख़ी से हमें ये हौसला मिलता है
इन में सजा कर ख़्वाब सुनहरे हम को मोहब्बत करनी है

दिल की सैंकड़ों परतें हैं और हर इक परत में तेरा प्यार
जलें मरें ये लोग इकहरे हम को मोहब्बत करनी है