उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya kya fareb dil ko diye iztirab mein

क्या क्या फ़रेब दिल को दिए इज़्तिराब में

کیا کیا فریب دل کو دیے اضطراب میں

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या क्या फ़रेब दिल को दिए इज़्तिराब में
उन की तरफ़ से आप लिखे ख़त जवाब में

क्या जानें क्या सिखाएँगे उन को सलाह-कार
हर रोज़ गुफ़्तुगू है नई मेरे बाब में

पीर-ए-मुग़ाँ की दिल-शिकनी का रहा ख़याल
दाख़िल हुआ हूँ तौबा से पहले सवाब में

रखना क़दम तसव्वुर-ए-जानाँ संभाल कर
काई है जा-ब-जा मिरी चश्म-ए-पुर-आब में

ऐ शैख़ जो बताए म-ए-इश्क़ को हराम
ऐसे के दो लगाए भिगो कर शराब में

ऐ 'दाग़' कोई मुझ सा न होगा गुनाहगार
है मासियत से मेरी जहन्नम अज़ाब में