उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya kya chehre chiKH rahe hain yaadon ke ambar tale

क्या क्या चेहरे चीख़ रहे हैं यादों के अम्बार तले

کیا کیا چہرے چیخ رہے ہیں یادوں کے انبار تلے

शायर: Qaisarul Jafri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या क्या चेहरे चीख़ रहे हैं यादों के अम्बार तले
दिल पर ऐसा बोझ धरा है जो हटने का नाम न ले

अपनी टूटी छत पर शायद इक दिन सूरज चमका था
मुट्ठी में कुछ धूप चुराए बैठा हूँ दीवार तले

पतझड़ के आवारा झोंके उन पर डेरा डाले हैं
जिन शाख़ों पर बिछड़े पंछी आ मिलते थे शाम ढले

क़िस्मत हम को फेंक गई है तेज़ हवा की राहों में
दिल भी क्या है एक दिया है देखें कितनी देर जले

मुँह देखी बातों में यारो क्या रक्खा है रहने दो
हाल हमारा तुम मत पूछो जाओ हम बीमार भले

दुनिया का दस्तूर यही है ना-क़दरी की बात नहीं
जो भी लम्हों को ठुकराए सदियों अपने हाथ मले

अपनी अपनी सब की राहें अपना अपना सब का सफ़र
तुम भी किसी के साथ चले हो हम भी किसी के साथ चले

जाने रस्ता बंद है 'क़ैसर' या कोई पछतावा है
इस नगरी से जो भी जाए फिर आने का नाम न ले