उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya kisi rabte mein rakkha hai

क्या किसी राब्ते में रक्खा है

کیا کسی رابطے میں رکھا ہے

शायर: Aamir Azher6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या किसी राब्ते में रक्खा है
हम ने दिल रास्ते में रक्खा है

अब ख़ुदाओं की क्या ज़रूरत है
आइना बुत-कदे में रक्खा है

न तुम्हारी ख़ता न मेरी है
मसअला मसअले मैं रक्खा है

रात रक्खी है उस ने दिन के बा'द
आप को फ़ाएदे में रक्खा है

क्या रखा है पुरानी चीज़ों में
जो नया है नए में रक्खा है

अगले वक़्तों पे सोच कर 'आमिर'
हाल को क़ा'एदे में रक्खा है