उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya KHabar thi ek din ye hadisa ho jaega

क्या ख़बर थी एक दिन ये हादिसा हो जाएगा

کیا خبر تھی ایک دن یہ حادثہ ہو جائے گا

शायर: Ejaz Ansari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या ख़बर थी एक दिन ये हादिसा हो जाएगा
उम्र भर चाहा जिसे वो बेवफ़ा हो जाएगा

हो अगर अज़्म-ए-मुसम्मम ख़्वाहिश-ए-मंज़िल के साथ
राह का पत्थर भी इक दिन रहनुमा हो जाएगा

इस क़दर बढ़ने लगी है हर तरफ़ आलूदगी
साँस लेना आदमी का मसअला हो जाएगा

ज़िंदगी भर साथ चलने की जो खाता है क़सम
देखना वो रास्ते ही में जुदा हो जाएगा

अब तुम्हारा कोई ख़त कोई ख़बर मिलती नहीं
ऐसे आलम में तो जीना भी सज़ा हो जाएगा

सर उठाते हैं यहाँ भी अस्र-ए-हाज़िर के यज़ीद
कल ये ख़ित्ता भी महाज़-ए-कर्बला हो जाएगा

कुछ न कुछ 'एजाज़' नग़्मे लिख वतन के नाम पर
इस तरह से शाइ'री का हक़ अदा हो जाएगा