उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh zard zard patte nishan jo KHizan ke hain

कुछ ज़र्द ज़र्द पत्ते निशाँ जो ख़िज़ाँ के हैं

کچھ زرد زرد پتے نشاں جو خزاں کے ہیں

शायर: Yagana Changezi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ ज़र्द ज़र्द पत्ते निशाँ जो ख़िज़ाँ के हैं
नैरंग-ए-दिल-फ़रेब ये सब आसमाँ के हैं

इक आग सी लगी है ज़माने में हर तरफ़
क्या जाने ज़मज़मे ये किस आतिश-ज़बाँ के हैं

हम दिल-जलों को हुज़्न-ओ-अलम से है सोज़-ओ-साज़
अंदाज़ ज़मज़मों में भी आह-ओ-फ़ुग़ाँ के हैं

ये भी तो हैं ख़राब उसी चश्म-ए-मस्त के
परहेज़-गार हज़रत-ए-वाइज़ कहाँ के हैं

उठ उठ के बैठ जाता है बाँग-ए-जरस पे दिल
देख ऐ फ़लक ये हौसले इस ना-तवाँ के हैं

गुज़रे हुए ज़माने की अब याद क्या ज़रूर
चर्चे क़फ़स-नसीबों में क्यूँ आशियाँ के हैं