उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh to jawab abru-e-KHamdar le chalo

कुछ तो जवाब अबरू-ए-ख़मदार ले चलो

کچھ تو جواب ابروئے خم دار لے چلو

शायर: Badr Jamali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ तो जवाब अबरू-ए-ख़मदार ले चलो
ज़हराब में बुझी हुई तलवार ले चलो

परखो मुझे बना के ख़रीदार ले चलो
यूसुफ़ बिकें अगर सर-ए-बाज़ार ले चलो

इस अंजुमन में दोस्तों संजीदगी है कम
तुम अपने साथ तल्ख़ी-ए-अफ़्कार ले चलो

फिर तेज़ हो गई ग़म-ए-ख़ुद-आगही की आँच
फिर मुझ को सू-ए-ख़ाना-ए-ख़म्मार ले चलो

बे-साख़्ता कहीं न उगल दूँ मैं राज़-ए-दिल
मुँह-फट हूँ तुम मुझे भी सर-ए-दार ले चलो

फिर माँगती है दिल की तड़प सज्दा-रेज़ियाँ
फिर मुझ को नज़्द-ए-संग-ए-दर-ए-यार ले चलो

बहर-ए-सुकून-ए-क़ल्ब 'जमाली' को दोस्तो
जिस जा हैं जम' साक़ी-ओ-मय-ख़्वार ले चलो