उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh nazare hain kuchh nazar baqi

कुछ नज़ारे हैं कुछ नज़र बाक़ी

کچھ نظارے ہیں کچھ نظر باقی

शायर: Om Prabhakar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ नज़ारे हैं कुछ नज़र बाक़ी
और कुछ कोस का सफ़र बाक़ी

रह गया है किताब में दिन की
शाम का बाब-ए-मुख़्तसर बाक़ी

इस ख़िज़ाँ में भी कुछ महकता है
दिल है बाक़ी अभी जिगर बाक़ी

ख़ाक ही ख़ाक हूँ मगर छू मत
इश्क़ का है अभी शरर बाक़ी

वक़्त-ए-रुख़्सत पलट के बरसी जो
है निगाहों में वो नज़र बाक़ी

धुल गई थी जो तेरे अश्कों से
ख़त में वो ही है इक सतर बाक़ी

कसमसाते हैं पाँव के छाले
है अभी भी कोई सफ़र बाक़ी