उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh lag kuchh lagaw mohabbat mein chahiye

कुछ लाग कुछ लगाव मोहब्बत में चाहिए

کچھ لاگ کچھ لگاو محبت میں چاہئے

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ लाग कुछ लगाव मोहब्बत में चाहिए
दोनों तरह का रंग तबीअत में चाहिए

ये क्या कि बुत बने हुए बैठे हो बज़्म में
कुछ बे-तकल्लुफ़ी भी तो ख़ल्वत में चाहिए

वो इब्तिदा-ए-इश्क़ में हासिल हुई मुझे
जो बात इंतिहा-ए-मोहब्बत में चाहिए

आएँगे बे-शुमार फ़रिश्ते अज़ाब के
मैदान-ए-हश्र ग़ैर की तुर्बत में चाहिए

कुछ तो पड़े दबाव दिल-ए-बे-क़रार पर
पारा भरा हुआ मिरी तुर्बत में चाहिए

माशूक़ के कहे का बुरा मानते हो 'दाग़'
बर्दाश्त आदमी की तबीअत में चाहिए