उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh aur dil-lagi nahin us bad-nasib se

कुछ और दिल-लगी नहीं उस बद-नसीब से

کچھ اور دل لگی نہیں اس بد نصیب سے

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ और दिल-लगी नहीं उस बद-नसीब से
हम जानते हैं खेलते हो तुम रक़ीब से

मैं बद-गुमानियों का भी मम्नून हो गया
वो हाल पूछ लेते हैं मेरा तबीब से

दुश्मन बनाए हैं मिरी क़िस्मत ने सैंकड़ों
चाहा है तुझ को ख़ल्क़ ने मेरे नसीब से

ऐ नासेह-ए-शफ़ीक़ रहे कुछ तो छेड़-छाड़
ज़िक्र-ए-हबीब कम नहीं वस्ल-ए-हबीब से

मानिंद-ए-बर्क़ मिस्ल-ए-हवा सूरत-ए-निगाह
अक्सर निकल गए हैं वो मेरे क़रीब से

पूछो जनाब-ए-'दाग़' की हम से शरारतें
क्या सर झुकाए बैठे हैं हज़रत ग़रीब से