उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh ajab haal hai mere ji ka

कुछ अजब हाल है मिरे जी का

کچھ عجب حال ہے مرے جی کا

शायर: Jaleel Qidwai7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ अजब हाल है मिरे जी का
उस के माथे पे देख कर टीका

बज़्म में इस तरह वो दर आए
शम्अ' का रंग पड़ गया फीका

ज़िंदगी तुझ से छूट कर प्यारे
एक जंजाल है मिरे जी का

ऐ पपीहे तुझे ख़ुदा की क़सम
नाम बरसात में न ले पी का

किसी सूरत न कामगार हुआ
बख़्त को अपने उम्र-भर झीका

मेहरबाँ तुम जो थे तो गर्दिश-ए-चर्ख़
बाल मेरा न कर सकी बीका

अहल-ए-इशरत इधर न आएँ 'जलील'
इश्क़ है सर-बसर ज़ियाँ जी का