उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koshish nakaam kyon hui hai

कोशिश नाकाम क्यों हुई है

کوشش ناکام کیوں ہوئی ہے

शायर: Zafar Iqbal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोशिश नाकाम क्यों हुई है
ख़्वाहिश इल्ज़ाम क्यों हुई है

थे यूँ तो हलाल-ख़ोर हम पर
वो शक्ल हराम क्यों हुई है

सूरज तो अभी खड़ा है देखो
फिर शह्र में शाम क्यों हुई है

इतनी ख़ामोश रह के वो आँख
फिर महव-ए-कलाम क्यों हुई है

कैसी गुमनाम थी मोहब्बत
ऐसी बदनाम क्यों हुई है

जो ख़ास थी एक ‘आदत-ए-बद
हर सम्त वो 'आम क्यों हुई है

जीने से पेशतर ही आख़िर
ये 'उम्र तमाम क्यों हुई है

थी राह सफ़र की जो 'ज़फ़र' वो
अब जा-ए-क़याम क्यों हुई है