उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi shikwa koi gila rakhiye

कोई शिकवा कोई गिला रखिए

کوئی شکوہ کوئی گلہ رکھیے

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई शिकवा कोई गिला रखिए
कुछ न कुछ जारी सिलसिला रखिए

मसअले ज़िंदगी के अपनी जगह
फ़स्ल-ए-गुल का भी कुछ पता रखिए

चंद लम्हे छुपा के लोगों से
ख़ुद को ख़ुद में भी मुब्तला रखिए

सब को अपनाइए मगर ख़ुद से
ख़ुद का थोड़ा सा फ़ासला रखिए

जिस्म दे दीजिए ज़माने को
याद से सिर्फ़ दिल मिला रखिए