उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi sarmaya kab raha mahfuz

कोई सरमाया कब रहा महफ़ूज़

کوئی سرمایہ کب رہا محفوظ

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई सरमाया कब रहा महफ़ूज़
इक फ़क़ीरी का रास्ता महफ़ूज़

गोशा-ए-दिल है आलम-ए-हैरत
बड़ा मा'मूर है बड़ा महफ़ूज़

दश्त फिर क्यों नहीं रहे आबाद
अब्र आज़ाद है हवा महफ़ूज़

कश्मकश में है ताइर-ए-फ़िरदौस
ज़मीं आबाद और ख़ला महफ़ूज़

जो हवा की पनाह में आए
वही रह जाएगा दिया महफ़ूज़