उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi saya sa lipaT jata hai dil se aa kar

कोई साया सा लिपट जाता है दिल से आ कर

کوئی سایہ سا لپٹ جاتا ہے دل سے آ کر

शायर: Yasmeen Hameed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई साया सा लिपट जाता है दिल से आ कर
खिड़कियाँ खोलनी पड़ती हैं मुझे घबरा कर

बे-समर पेड़ों की ख़्वाहिश भी अजब ख़्वाहिश है
बीज बोती हूँ कहीं और से मिट्टी ला कर

ख़ाक पर फूल जो खिलता है तो मैं सोचती हूँ
कोई ख़ुश होता था इक रंग मुझे पहना कर

अपने गहनों में किसी और का चेहरा देखा
ज़िंदगी मुझ पे हँसी मेरे ही घर में आ कर

जैसे दुनिया से बहुत दूर चली आई हूँ
मुतमइन रहती हूँ इक झूट से जी बहला कर