उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi qimat lagae sae ki

कोई क़ीमत लगाए साए की

کوئی قیمت لگائے سائے کی

शायर: Aarif Nazeer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई क़ीमत लगाए साए की
है ये दीवार भी किराए की

बुझ गया है पड़ा पड़ा सिगरेट
चुस्कियाँ ले रहा हूँ चाय की

हम पे मसनू'ई धूप फैला कर
उजरतें माँगते हैं साए की

वो जो गुमनाम से सुख़न-वर हैं
शा'इरी कर रहे हैं पाए की

रक़्स-ओ-मय की सजी ये महफ़िल और
साथ में हल्की हल्की गायकी

मशवरा आप से लिया हम ने
और फिर रद्द सभी की राय की

अपने सारे ख़फ़ा हैं 'आरिफ़' जी
आप को फ़िक्र है पराए की