उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi mare to mar Dale mujhe

कोई मारे तो मार डाले मुझे

کوئی مارے تو مار ڈالے مجھے

शायर: Aarif Nazeer10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई मारे तो मार डाले मुझे
इस ख़राबे से तो निकाले मुझे

'इज़्ज़त-ए-नफ़्स मेरी बच जाए
मुझ को आवाज़ दे बुला ले मुझे

जुस्तुजू थी कि तेरे लब पढ़ता
तू पढाती रही रिसाले मुझे

बस अंधेरे से दोस्ती कर ली
जब डराने लगे उजाले मुझे

ये सितम है मिरे ख़ुलूस के साथ
कर के मदहोश फिर सँभाले मुझे

वो हक़ीक़त-पसंद लड़की भी
कर गई ख़्वाब के हवाले मुझे

पुर-सुकूँ नींद उड़ गई है मिरी
ऐ मिरी माँ गले लगा ले मुझे

बाप के बा'द मुश्किलें देखीं
ज़र्रे लगने लगे हिमालय मुझे

कौन रद कर सकेगा मेरे गीत
तू जो इक बार गुनगुना ले मुझे

हर घड़ी याद आते हैं 'आरिफ़'
हाए वो नैन काले काले मुझे