उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi hai baat kai bar bulate hain mujhe

कोई है बात कई बार बुलाते हैं मुझे

کوئی ہے بات کئی بار بلاتے ہیں مجھے

शायर: Nabil Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई है बात कई बार बुलाते हैं मुझे
बाँटने ग़म मिरा ग़म-ख़्वार बुलाते हैं मुझे

फ़स्ल शादाब है उल्फ़त की ज़मीं पर अपनी
शहर के सारे ज़मीं-दार बुलाते हैं मुझे

अच्छे दामों में ज़मीर अपना निकल जाता पर
बस समझदार ख़रीदार बुलाते हैं मुझे

मेरे रोने पे हँसी जिन को बहुत आती है
उन को लगता हूँ मज़ेदार बुलाते हैं मुझे

तुझ से मिलने नहीं आया तो यही वजह थी बस
तेरी महफ़िल में गुनहगार बुलाते हैं मुझे