उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi batlae ki ye turfa tamasha kyun hai

कोई बतलाए कि ये तुर्फ़ा तमाशा क्यूँ है

کوئی بتلائے کہ یہ طرفہ تماشا کیوں ہے

शायर: Hafeez Banarasi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई बतलाए कि ये तुर्फ़ा तमाशा क्यूँ है
आदमी भीड़ में रहते हुए तन्हा क्यूँ है

पाँव फैलाए हुए ग़म का अंधेरा क्यूँ है
आ गई सुब्ह-ए-तमन्ना तो फिर ऐसा क्यूँ है

मैं तो इक ज़र्रा-ए-नाचीज़ हूँ और कुछ भी नहीं
वो जो सूरज है मिरे नाम से जलता क्यूँ है

तुझ को निस्बत है अगर नाम-ए-बराहीम से कुछ
आग को फूल समझ आग से डरता क्यूँ है

कौन सा अहद है जिस अहद में हम जीते हैं
दश्त तो दश्त है दरिया यहाँ प्यासा क्यूँ है

पी के बहकेगा तो रुस्वाई-ए-महफ़िल होगी
वो जो कम-ज़र्फ़ है मयख़ाने में आया क्यूँ है

कोई आसेब है या सिर्फ़ निगाहों का फ़रेब
एक साया मुझे हर सू नज़र आता क्यूँ है

याद किस की मह-ओ-ख़ुर्शीद लिए आई है
शब-ए-तारीक में आज इतना उजाला क्यूँ है

बद-हवासी का ये आलम कभी पहले तो न था
हश्र से पहले ही ये हश्र सा बरपा क्यूँ है