उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi zamin se kisi aasman se aate hain

किसी ज़मीं से किसी आसमाँ से आते हैं

کسی زمیں سے کسی آسماں سے آتے ہیں

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी ज़मीं से किसी आसमाँ से आते हैं
ग़ज़ल के शे'र तो दोनों जहाँ से आते हैं

वो चंद लफ़्ज़ धड़कते हैं जो दिलों की तरह
मिरी ज़बान में तेरी ज़बाँ से आते हैं

चले जो दर से तिरे खो गईं सभी सम्तें
बताएँ कैसे कि अब हम कहाँ से आते हैं

जहाँ पहुँच के न लौटे कभी फ़रिश्ते भी
वो ख़ुल्द हो कि न हो हम वहाँ से आते हैं

वो हम-सफ़र कि जो रहते हैं आख़िरी दम तक
बहुत पुरानी किसी दास्ताँ से आते हैं