उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ke haq mein sahi faisla hua to hai

किसी के हक़ में सही फ़ैसला हुआ तो है

کسی کے حق میں سہی فیصلہ ہوا تو ہے

शायर: Iftikhar Naseem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी के हक़ में सही फ़ैसला हुआ तो है
मिरा नहीं वो किसी शख़्स का हुआ तो है

यही बहुत है कि उस ने मुझे भी मिस तो किया
ये लम्स मुझ में अभी तक रचा हुआ तो है

उसे मैं खुल के कभी याद कर तो सकता हूँ
मुझे ख़ुशी है वो मुझ से जुदा हुआ तो है

सुकूत-ए-शब ही सही मेरा हम-सफ़र लेकिन
मिरे सिवा भी कोई जागता हुआ तो है

घुटन कि बढ़ती चली जा रही है अंदर की
तमाम ख़ुश हैं कि मौसम खुला हुआ तो है

ये और बात कि मैं ज़िंदा रह गया हूँ 'नसीम'
हर इक सितम मिरी जाँ पर रवा हुआ तो है