उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ke aks ko hairan karna chahta hun

किसी के अक्स को हैरान करना चाहता हूँ

کسی کے عکس کو حیران کرنا چاہتا ہوں

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी के अक्स को हैरान करना चाहता हूँ
मैं संग-ओ-आइना यक-जान करना चाहता हूँ

बुलंद करता हूँ दस्त-ए-दुआ' कि जैसे मैं
किसी की ज़ात पर एहसान करना चाहता हूँ

बहुत हक़ीर है लेकिन तुझे अता कर के
मैं दिल को तख़्त-ए-सुलैमान करना चाहता हूँ

मुझे ये ज़िंदगी दुश्वार भी क़ुबूल मगर
कहीं कहीं इसे आसान करना चाहता हूँ

मैं ऐसी कौन सी शय खो चुका हूँ जिस के एवज़
सभी को बे-सर-ओ-सामान करना चाहता हूँ