उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi kaghaz ke sine par ye jazba darj kar dena

किसी काग़ज़ के सीने पर ये जज़्बा दर्ज कर देना

کسی کاغذ کے سینے پر یہ جذبہ درج کر دینا

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी काग़ज़ के सीने पर ये जज़्बा दर्ज कर देना
मिरे भाई के हक़ में मेरा हिस्सा दर्ज कर देना

कई पहलू सबक़-आमेज़ इस क़िस्से में मुबहम हैं
हमारे साथ गुज़रा है ये क़िस्सा दर्ज कर देना

अगर हँसने हँसाने पर कोई कॉलम लिखा जाए
तो मेरे हुक्मरानों का रवय्या दर्ज कर देना

गए वक़्तों में रोना क़र्ज़ था सो रो चुका हूँ मैं
पुराना काट देना और उगला दर्ज कर देना

तसव्वुर में क़लम कुछ इस तरह गोया हुआ मुझ पर
कहीं दरिया के दिल पर मुझ को प्यासा दर्ज कर देना

किरामन कातिबीं तुम को क़सम ख़िल्क़त के ख़ालिक़ की
मिरी गुस्ताख़ियों पर लफ़्ज़ तौबा दर्ज कर देना

अगर काग़ज़ के चेहरे को सजाना हो कभी 'ताहिर'
लब-ए-काग़ज़ पे कोई एक मिसरा दर्ज कर देना