उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi chashm-e-hunar ki pasbani mein nahin rahna

किसी चश्म-ए-हुनर की पासबानी में नहीं रहना

کسی چشم ہنر کی پاسبانی میں نہیں رہنا

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी चश्म-ए-हुनर की पासबानी में नहीं रहना
सितारे को ज़ियादा देर पानी में नहीं रहना

ये मिट्टी क्यूँ मिरे क़दमों से लिपटी है कि जब मैं ने
हमेशा के लिए दुनिया-ए-फ़ानी में नहीं रहना

कहीं इस दास्ताँ में एक ऐसा मोड़ आएगा
जहाँ किरदार ने अपनी कहानी में नहीं रहना

तुझे हमराह तो रख लूँगा मैं लेकिन दिल-ए-सादा
तिरी बाबत ज़ियादा ख़ुश-गुमानी में नहीं रहना

मुझे इक ऐसी दुनिया भी बसानी है जहाँ 'शहज़ाद'
किसी को भी किसी की हुक्मरानी में नहीं रहना