उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis taraf qafila jaana hai kahan dekhte hain

किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं

کس طرف قافلہ جانا ہے کہاں دیکھتے ہیں

शायर: Ibrahim Ali Zeeshan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं
हम तो बस आप के पैरों के निशाँ देखते हैं

ऐसा माहौल बना रक्खा है दरवाज़े पर
आते जाते हुए सब मेरा मकाँ देखते हैं

जंग बीनाई को किस मोड़ पे ले आई है
आसमाँ देखना चाहें तो धुआँ देखते हैं

लोग कहते हैं तू मौजूद नहीं दुनिया में
हम को फिर भी नज़र आता है जहाँ देखते हैं

पैरहन देख रहे हैं ये सभी लोग मिरा
तुम तो कहते थे कि अंदाज़-ए-बयाँ देखते हैं