उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis ki ye siyasat hai kis ki hain ye tadbiren

किस की ये सियासत है किस की हैं ये तदबीरें

کس کی یہ سیاست ہے کس کی ہیں یہ تدبیریں

शायर: Sabiha Sumbul6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस की ये सियासत है किस की हैं ये तदबीरें
रहज़नों ने पाई हैं रहबरों की तक़दीरें

मेरे ख़्वाब-ए-वहशत की जाने क्या हों ता'बीरें
दार है न ज़िंदाँ है तौक़ है न ज़ंजीरें

आप की अमानत हैं आप ही मिटा दीजे
ये नुक़ूश उल्फ़त के ये वफ़ा की तहरीरें

कह रहा है सदियों से ताज का हसीं चेहरा
फ़न अगर मुकम्मल हो बोलती हैं तस्वीरें

लोग जाने क्यूँ उस को कह रहे हैं दीवाना
वो तो अपने ख़्वाबों की ढूँढता है ता'बीरें

लूट लें न फ़रज़ाने अज़्मत-ए-जुनूँ 'सुम्बुल'
थक गए हैं दीवाने सो गई हैं ज़ंजीरें