उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis ki aawaz kan mein aai

किस की आवाज़ कान में आई

کس کی آواز کان میں آئی

शायर: Yagana Changezi14 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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किस की आवाज़ कान में आई
दूर की बात ध्यान में आई

ऐसी आज़ाद रूह इस तन में
क्यों पुराने मकान में आई

आप आते रहे बुलाते रहे
आने वाली इक आन में आई

हाए क्या क्या निगाह भटकी है
जब कभी इम्तिहान में आई

ये किनारा चला कि नाव चली
कहिए क्या बात ध्यान में आई

इल्म क्या इल्म की हक़ीक़त क्या
जैसी जिस के गुमान में आई

कौन जाने निदा-ए-हक़ क्या है
किस ख़ुदा की ज़बान में आई

ऐसी पाए ख़ता कि उफ़ न करे
ढील जिस की ज़बान में आई

हुस्न क्या ख़्वाब से हुआ बेदार
जान ताज़ा जहान में आई

आप की ये अकड़ अरे तौबा
कब किसी नौजवान में आई

जान-लेवा है ये चढ़ी तेवरी
ये कशिश किस कमान में आई

बात अधूरी मगर असर दोना
अच्छी लुक्नत ज़बान में आई

आँख नीची हुई अरे ये क्या
क्यों ग़रज़ दरमियान में आई

मैं पयम्बर नहीं 'यगाना' सही
इस से क्या कस्र शान में आई