उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwab aisa ho ki chashm-e-KHwab ash-ash kar uThe

ख़्वाब ऐसा हो कि चश्म-ए-ख़्वाब अश-अश कर उठे

خواب ایسا ہو کہ چشم خواب اش اش کر اٹھے

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाब ऐसा हो कि चश्म-ए-ख़्वाब अश-अश कर उठे
चाँद निकले नींद का नीलाब अश-अश कर उठे

शर्त जो तुझ को लगानी है लगा ले दोस्ता
उस के जल्वे पर अगर महताब अश-अश कर उठे

पीली कुर्ती हो तिरी आँचल हो धानी रंग का
रूप तेरा देख कर पंजाब अश-अश कर उठे

दिल की बेताबी का जब मज़कूर हो ऐ हमनशीं
ख़ुद ज़बान-ए-हाल से सीमाब अश-अश कर उठे

झूम उठे दिल हुस्न-ए-फ़ितरत की नुमाइश देख कर
आदमी की चश्म-ए-हैरत-याब अश-अश कर उठे

फूल निकलें शाख़चों से छतरियाँ ताने हुए
बारिशों में क़ित'आ-ए-ख़ुश-आब अश-अश कर उठे

ज़हर में डूबी हुई वो दाद थी 'यावर-अज़ीम'
रश्क के मारे हुए अहबाब अश-अश कर उठे