उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHub tamasha hum ko banaya aap tamasha aap hue

ख़ूब तमाशा हम को बनाया आप तमाशा आप हुए

خوب تماشا ہم کو بنایا آپ تماشا آپ ہوئے

शायर: Ijtiba Rizvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ूब तमाशा हम को बनाया आप तमाशा आप हुए
हम को रुस्वा करने निकले कैसे रुस्वा आप हुए

तोहमत-ए-काबा आप ने ली बदनाम-ए-कलीसा आप हुए
तूर पे बिजली क़स्र में शीरीं नज्द में लैला आप हुए

मा'नी-ओ-सूरत वहदत-ओ-कसरत ज़र्रा-ओ-सहरा आप हुए
आप तो कुछ होते ही नहीं थे कहिए क्या क्या आप हुए

हम पे शरीअ'त हम पे तरीक़त हम पे हुदूद-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र
आप चले तो गुलशन गुलशन सहरा सहरा आप हुए

शो'ले से ही राख हुई थी शो'ले से फिर राख जली
ख़िरमन मूसा कौन बना जब बर्क़-ए-तजल्ली आप हुए

आप ने छुप छुप कर इस दिल में अपनी इक तस्वीर गढ़ी
पूज के उस को हम हुए काफ़िर कुफ़्र का फ़तवा आप हुए

रोज़-ए-अज़ल से आप की मेरी कैसी रस्म-ओ-राह निभी
अव्वल अव्वल हम हुए शैदा आख़िर शैदा आप हुए