उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHushi ki baat thi lekin mujhe rula gai hai

ख़ुशी की बात थी लेकिन मुझे रुला गई है

خوشی کی بات تھی لیکن مجھے رلا گئی ہے

शायर: Ejaz Haidar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुशी की बात थी लेकिन मुझे रुला गई है
कहाँ से बात चली थी कहाँ तक आ गई है

मिरा ख़ुदा तो यक़ीनन भरम रखेगा मिरा
मैं जानता हूँ कि उस तक मिरी दुआ गई है

मैं आम तौर पे चलता हूँ उस से आगे मगर
कहीं कहीं मिरे आगे मिरी अना गई है

मैं अपने नाम की तख़्ती नहीं लगाता कहीं
मिरा पता मिरी बे-माएगी बता गई है

सँभल के बैठ तू मसनद पे साहिब-ए-मंसब
किसी की जान किसी की यहाँ क़बा गई है

तुझे ये ज़ो'म फ़क़त तू था रौनक़-ए-महफ़िल
जरस की गूँज तिरे बाद जा-ब-जा गई है