उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab koi baat mulaqat pe mat chhoDiyega

अब कोई बात मुलाक़ात पे मत छोड़िएगा

اب کوئی بات ملاقات پہ مت چھوڑیئے گا

शायर: Ejaz Haidar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब कोई बात मुलाक़ात पे मत छोड़िएगा
हाल कह दीजेगा हालात पे मत छोड़िएगा

गाते रहिएगा कड़ी धूप में भी नग़्मा-ए-इश्क़
अब जुनूँ मौसम-ए-बरसात पे मत छोड़िएगा

चश्म-ए-हैरत में नमी रखिएगा विज्दान की भी
राज़ सारे ही करामात पे मत छोड़िएगा

शहर में रखिएगा कुछ पेड़ लगाने की जगह
ये फ़रीज़ा भी मज़ाफ़ात पे मत छोड़िएगा

यार जब ध्यान में आ जाए वहीं कीजिए रक़्स
जश्न अब सूरत-ए-हालात पे मत छोड़िएगा

बे-सबब टूट भी जाती है कभी बात कहीं
दोस्त अच्छा हो तो इस बात पे मत छोड़िएगा

जो भी होना है वो हो कर ही रहेगा 'हैदर'
या'नी दिल वहम-ओ-ख़यालात पे मत छोड़िएगा