उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijr kuchh is tarah guzara hai

हिज्र कुछ इस तरह गुज़ारा है

ہجر کچھ اس طرح گزارا ہے

शायर: Ejaz Haidar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिज्र कुछ इस तरह गुज़ारा है
वस्ल कह कर उसे पुकारा है

एक तन्हाई थी मिरी अपनी
इस पे भी उस का ही इजारा है

उम्र इतनी अभी हुई तो नहीं
जितना मैं ने उसे गुज़ारा है

फ़ैसला हो नहीं सका अब तक
कौन से ग़म ने मुझ को मारा है

ज़िंदगी फिर भी मेरे जैसी रही
मैं ने तो इस को ही सँवारा है

मेरी जानिब है आप की उँगली
पर किसी और का इशारा है