उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gar nahin kuchh bhi aap se milna

गर नहीं कुछ भी आप से मिलना

گر نہیں کچھ بھی آپ سے ملنا

शायर: Ejaz Haidar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गर नहीं कुछ भी आप से मिलना
आप से फिर नहीं मुझे मिलना

वक़्त माँगा न कर तू मिलने का
अस्ल मिलना है बिन कहे मिलना

यार कुछ इंतिज़ाम ऐसा कर
आख़िरी साँस तक रहे मिलना

रोज़ मिलने का मैं नहीं कहता
ज़िंदगी भर गहे गहे मिलना

इस से पहले कि ये भी खो जाएँ
क़हक़हे कुछ रहे सहे मिलना