उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHudi ka nashsha chaDha aap mein raha na gaya

ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया

خودی کا نشہ چڑھا آپ میں رہا نہ گیا

शायर: Yagana Changezi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया
ख़ुदा बने थे 'यगाना' मगर बना न गया

पयाम-ए-ज़ेर-ए-लब ऐसा कि कुछ सुना न गया
इशारा पाते ही अंगड़ाई ली रहा न गया

हँसी में वादा-ए-फ़र्दा को टालने वालो
लो देख लो वही कल आज बन के आ न गया

गुनाह-ए-ज़िंदा-दिली कहिए या दिल-आज़ारी
किसी पे हँस लिए इतना कि फिर हँसा न गया

पुकारता रहा किस किस को डूबने वाला
ख़ुदा थे इतने मगर कोई आड़े आ न गया

करूँ तो किस से करूँ दर्द-ए-ना-रसा का गिला
कि मुझ को ले के दिल-ए-दोस्त में समा न गया

बुतों को देख के सब ने ख़ुदा को पहचाना
ख़ुदा के घर तो कोई बंदा-ए-ख़ुदा न गया

कृष्ण का हूँ पुजारी अली का बंदा हूँ
'यगाना' शान-ए-ख़ुदा देख कर रहा न गया