उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHizan ka koi wajud hai na chaman mein rang-e-bahaar hai

ख़िज़ाँ का कोई वजूद है न चमन में रंग-ए-बहार है

خزاں کا کوئی وجود ہے نہ چمن میں رنگ بہار ہے

शायर: Baldev Raaj6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़िज़ाँ का कोई वजूद है न चमन में रंग-ए-बहार है
जिसे जानता है तू कारवाँ वो तिरी नज़र का ग़ुबार है

न जमाल में हैं लताफ़तें न लताफ़तों में है बे-ख़ुदी
ये जुनून-ए-इश्क़ का भूत है जो बशर के सर पे सवार है

मुझे बे-नियाज़-ए-अलम न कर मुझे बे-नसीब-ए-सितम न कर
मिरे ग़म की लज़्ज़त-ए-जावेदाँ मिरी ज़िंदगी की बहार है

ये नहीं नशात का ज़मज़मा इसे गोश-ए-होश से सुन ज़रा
मिरे साज़-ए-दिल की सदा नहीं मिरी बे-कसी की पुकार है

मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे मुझे ऐसी सख़्त सज़ा न दे
मुझे देख आ के क़रीब-तर मिरा हर नफ़स मुझे बार है

है ख़बर असीर रिहा हुए हैं फ़रोग़ दौर-ए-बहार में
चलो 'राज' हम भी चले चलें कि चमन में उर्स-ए-बहार है