उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fikr-o-KHayal mein tumhein lane se faeda

फ़िक्र-ओ-ख़याल में तुम्हें लाने से फ़ाएदा

فکر و خیال میں تمہیں لانے سے فائدہ

शायर: Baldev Raaj10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़िक्र-ओ-ख़याल में तुम्हें लाने से फ़ाएदा
ख़ुद अपने घर में आग लगाने से फ़ाएदा

बैठे बिठाए जी को जलाने से फ़ाएदा
तामीर-ए-ज़िंदगी को मिटाने से फ़ाएदा

फ़रियाद-ओ-आह नाला-ओ-शेवन फ़ुज़ूल हैं
शब की ख़मोशियों को जगाने से फ़ाएदा

पामाल हो चुके हैं ये अंदाज़-ए-आशिक़ी
यूँ सर किसी के दर पे झुकाने से फ़ाएदा

अच्छा नहीं है इश्क़ में ख़ुद्दारियों का ख़ून
जो ख़ुद न आए उस को बुलाने से फ़ाएदा

इश्क़ और ख़याल-ए-ता'न-ए-ज़माना ग़लत ग़लत
आख़िर बताओ हम को ज़माने से फ़ाएदा

अश्कों में बह चुकी है निगाह-ए-जमाल जो
अब बे-नक़ाब सामने आने से फ़ाएदा

गर जावेदाँ नहीं है मोहब्बत तो ऐ नदीम
ये ख़्वाब-ए-ज़र-निगार दिखाने से फ़ाएदा

बहर-ए-सुकूँ में डूब गई मौज-ए-इज़्तिराब
साहिल पे ग़म का सोग मनाने से फ़ाएदा

मैं बेवफ़ा हूँ तुम हो वफ़ादार हाँ दुरुस्त
ऐ 'राज' और बात बढ़ाने से फ़ाएदा