उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab meri nigahon mein auj hai na pasti hai

अब मिरी निगाहों में औज है न पस्ती है

اب مری نگاہوں میں اوج ہے نہ پستی ہے

शायर: Baldev Raaj8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब मिरी निगाहों में औज है न पस्ती है
एक सैल-ए-मद-होशी इक हुजूम-ए-मस्ती है

ऐ निगाह-ए-ना-महरम इश्क़ की वो बस्ती है
जिस क़दर उजड़ती है उस क़दर ही बस्ती है

आशिक़ी-ओ-महबूबी आइने के दो रुख़ हैं
हुस्न एक बादा है इश्क़ एक मस्ती है

जज़्बा-ए-इबादत को रख जज़ा से बेगाना
वर्ना हक़-परस्ती भी इक हवस-परस्ती है

दिल की पाएमाली का ग़म तो कुछ नहीं लेकिन
ऐसी पुर-फ़ज़ा बस्ती मुश्किलों से बस्ती है

दीदा-वर कोई देखे शान-ए-पीर-ए-मय-ख़ाना
इस ख़ुदी के चेहरे से बे-ख़ुदी बरसती है

हिम्मतों के बल उट्ठो ख़ुद-रवी के बल निकलो
लग़्ज़िशों के बल चलना नंग-ए-मय-परस्ती है

आदमी के चेहरे पर बंदगी नहीं रहती
वर्ना ख़ुद-परस्ती भी इक ख़ुदा-परस्ती है