उर्दू शायरी · ग़ज़ल

badla hua hai rang-e-gulistan mere liye

बदला हुआ है रंग-ए-गुलिस्ताँ मिरे लिए

بدلا ہوا ہے رنگ گلستاں مرے لیے

शायर: Baldev Raaj7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बदला हुआ है रंग-ए-गुलिस्ताँ मिरे लिए
ख़ूँ रो रही है चश्म-ए-बहाराँ मिरे लिए

फ़ैज़-ए-जुनून-ए-शौक़ के क़ुर्बान जाइए
वुसअ'त है दो-जहान की ज़िंदाँ मिरे लिए

सब अहल-ए-दिल हैं तेरी निगाहों से फ़ैज़याब
अब तू कहाँ है सिर्फ़ मिरी जाँ मिरे लिए

मैं ख़ुद ही छोड़ जाऊँगा ये महफ़िल-ए-हयात
क्यों हो रहे हो इतने परेशाँ मिरे लिए

वो ज़िंदगी जिसे तिरी महफ़िल में बार था
अब हो गई है ख़्वाब-ए-गुरेज़ाँ मिरे लिए

ऐ मेरे चाक-चाक गरेबाँ से बे-ख़बर
तू भी फिरेगा चाक-गरेबाँ मिरे लिए

फूलों के नाज़ अहल-ए-चमन को रहें नसीब
ख़ंदाँ हैं ख़ार-हा-ए-बयाबाँ मिरे लिए