उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHiram-e-naz se shaKH-e-gulab mahw-e-amal

ख़िराम-ए-नाज़ से शाख़-ए-गुलाब महव-ए-'अमल

خرام ناز سے شاخ گلاب محو عمل

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़िराम-ए-नाज़ से शाख़-ए-गुलाब महव-ए-'अमल
शराबी महव-ए-नज़ारा शराब महव-ए-'अमल

सफ़ेद-ओ-सुर्ख़ कँवल ख़ू-ए-चश्म-ए-दाम लिए
खड़े हैं राह में लेकिन शबाब महव-ए-'अमल

असीर-ए-ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर असीर-ए-रक़्स-ओ-सुरूर
तू मुतमइन है मगर कामयाब महव-ए-'अमल

मक़ाम हो के मकीं अहल-ए-तमकनत न हुए
सो आप जाइए रहिए जनाब महव-ए-'अमल

हमारे दिल की ये क्या कैफ़ियत है हज़रत-ए-'इश्क़
नशात महव-ए-'अमल इज़्तिराब महव-ए-'अमल

हदफ़ को भूल गए साहिबान-ए-मुश्क-ए-ख़ुतन
पे आब-ओ-ताब से हैं सब ख़राब महव-ए-'अमल

ग़ज़ाल-ए-फ़िक्र-ओ-फ़िरासत भटक गए हैं 'स'ऊद'
हक़ीक़तें नहीं गोया हैं ख़्वाब महव-ए-'अमल