उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHidmat koi bataya kar

ख़िदमत कोई बताया कर

خدمت کوئی بتایا کر

शायर: Zafar Iqbal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़िदमत कोई बताया कर
हुक्म हमें फ़रमाया कर

इतना दूर नहीं रहते
थोड़ा पास बिठाया कर

मानते हैं सरदार तुझे
अपनी हमें रे'आया कर

दिल है गीली रेत इसे
ढाया और बनाया कर

खुली हवाएँ है क्या क्या
तू भी फिरा फिराया कर

रह रह के मत मार हमें
एक ही बार सफ़ाया कर

नए बखेड़ों को अब छोड़
पहले काम बक़ाया कर

घर ही बैठा रह न 'ज़फ़र'
बाहर जाया-आया कर