उर्दू शायरी · ग़ज़ल

khiDkiyan kis tarah ki hain aur dar kaisa hai wo

खिड़कियाँ किस तरह की हैं और दर कैसा है वो

کھڑکیاں کس طرح کی ہیں اور در کیسا ہے وہ

शायर: Zafar Iqbal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

खिड़कियाँ किस तरह की हैं और दर कैसा है वो
सोचता हूँ जिस में वो रहता है घर कैसा है वो

कैसी वो आब-ओ-हवा है जिस में वो लेता है साँस
आता जाता है वो जिस पर रहगुज़र कैसा है वो

कौन सी रंगत के हैं उस के ज़मीन-ओ-आसमाँ
छाँव है जिस की यहाँ तक भी शजर कैसा है वो

इक नज़र में ही नज़र आ जाएगा वो सर-ब-सर
फिर भी उस को देखना बार-ए-दिगर कैसा है वो

मैं तो उस के एक इक लम्हे का रखता हूँ शुमार
और मेरे हाल-ए-दिल से बे-ख़बर कैसा है वो

उस का होना ही बहुत है वो कहीं है तो सही
क्या सरोकार इस से है मुझ को 'ज़फ़र' कैसा है वो