उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHayal bahr ki bandish se laDne wala hai

ख़याल बहर की बंदिश से लड़ने वाला है

خیال بحر کی بندش سے لڑنے والا ہے

शायर: Lucky farooqi Hasrat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़याल बहर की बंदिश से लड़ने वाला है
ग़ज़ल का ज़ेहनी तवाज़ुन बिगड़ने वाला है

ये रूठने का सिला है की रूठने की सज़ा
वो आज मुझ को मना कर झगड़ने वाला है

उदासी अब्र की सूरत घिर आई आँखों में
तुम्हारी याद का मौसम बिगड़ने वाला है

हर एक शाख़ पे बैठे हैं नोक-झोंक के गिध
त'अल्लुक़ात का गुलशन उजड़ने वाला है

हमारे 'अह्द के एकलव्य का अँगूठा सिर्फ़
तलब के हाथ पे खैनी रगड़ने वाला है

अभी तो निकला था चंगुल से फ़क़्र की 'हसरत'
ये अज़दहा मुझे फिर से जकड़ने वाला है