उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHauf ki aaKHiri manzil se bana kar rakhiye

ख़ौफ़ की आख़िरी मंज़िल से बना कर रखिए

خوف کی آخری منزل سے بنا کر رکھیے

शायर: Lucky farooqi Hasrat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ौफ़ की आख़िरी मंज़िल से बना कर रखिए
इस का मतलब है कि क़ातिल से बना कर रखिए

बाहमी रब्त में होती नहीं गुंजाइश-ए-तर्क
आप दरिया हैं तो साहिल से बना कर रखिए

अक़्ल कहती है मोहब्बत से न रक्खो निस्बत
दिल ये कहता है मसाइल से बना कर रखिए

क़ैदी-ए-ज़ुल्फ़ की क़िस्मत में कहाँ आज़ादी
जाइए तौक़-ए-सलासिल से बना कर रखिए

अब दुआओं की ज़रूरत है तो याद आई ज़कात
मैं न कहता था की साइल से बना कर रखिए