उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHamosh nazron se husn-e-butan ki baat karen

ख़मोश नज़रों से हुस्न-ए-बुताँ की बात करें

خموش نظروں سے حسن بتاں کی بات کریں

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़मोश नज़रों से हुस्न-ए-बुताँ की बात करें
न लब पे आई जो उस दास्ताँ की बात करें

रह-ए-जुनूँ में भटकते कहाँ कहाँ पहुँचे
कहाँ कहाँ की सुनाएँ कहाँ की बात करें

जिगर के दाग़ दिखाने से फ़ाएदा क्या है
अबस है महज़ के ज़ोर-ए-ज़माँ की बात करें

न भूल जाए ज़माना वफ़ा की क़द्रों को
मिटे जो इश्क़ में उन के निशाँ की बात करें

जबीन-ए-शौक़ का सज्दा यहाँ वहाँ क्यों हो
जहाँ हो अज़्मत-ए-सर हम वहाँ की बात करें

क़दम क़दम पे गुज़रते हैं इम्तिहाँ कितने
चलो कि आज नए इम्तिहाँ की बात करें

ये याद-ए-लुत्फ़-ए-बहाराँ भी कम नहीं है 'हबीब'
भरी ख़िज़ाँ में भी क्या हम ख़िज़ाँ की बात करें