उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHafa hai gar ye KHudai to fikr hi kya hai

ख़फ़ा है गर ये ख़ुदाई तो फ़िक्र ही क्या है

خفا ہے گر یہ خدائی تو فکر ہی کیا ہے

शायर: Hafeez Banarasi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़फ़ा है गर ये ख़ुदाई तो फ़िक्र ही क्या है
तिरी निगाह सलामत मुझे कमी क्या है

बस इक तजल्ली-ए-रंगीं बस इक तबस्सुम-ए-नाज़
रियाज़-ए-दहर में फूलों की ज़िंदगी क्या है

ख़ुदा-रसीदा सही लाख बरगुज़ीदा सही
जो आदमी को न समझे वो आदमी क्या है

अबस ये मश्क़-ए-रुकू-ओ-सुजूद है यारो
अगर पता नहीं मफ़्हूम-ए-बंदगी क्या है

कहीं ये लुत्फ़-ओ-इनायत की इब्तिदा तो नहीं
तुम्हीं बताओ ये अंदाज़-ए-बरहमी क्या है

दिलों के तार जो छू ले वही है शेर 'हफ़ीज़'
अगर ये बात नहीं है तो शाइरी क्या है