उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun tha jo dast-e-qatil ke liye tayyar tha

कौन था जो दस्त-ए-क़ातिल के लिए तय्यार था

کون تھا جو دست قاتل کے لئے تیار تھا

शायर: Aabid Jafri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन था जो दस्त-ए-क़ातिल के लिए तय्यार था
एक मैं ही बज़्म-ए-अहल-ए-ख़्वाब में बेदार था

भर लिए हैं तीरगी से घर की दीवारों के घाव
क्या नया सूरज हमारे वास्ते आज़ाद था

ख़ुश्क नहरों से सदा-ए-तिश्नगी आती रही
और समुंदर मौज-ए-बे-आवाज़ से सरशार था

आ रहे थे मौसमों के नाम फूलों के पयाम
तुम न थे तो मौसम-ए-गुल भी निगह में ख़ार था

दे दिया घर के चराग़ों को हवा की गोद में
लोग कहते थे कि इक साया पस-ए-दीवार था

अब भी यूँ लगता है जैसे हर ख़बर हो आज की
इस लिए बरसों पुराना मेज़ पर अख़बार था