उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun si ja hai jahan husn ka shohra na hua

कौन सी जा है जहाँ हुस्न का शोहरा न हुआ

کون سی جا ہے جہاں حسن کا شہرا نہ ہوا

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन सी जा है जहाँ हुस्न का शोहरा न हुआ
इश्क़ बेचारा कहाँ दहर में रुस्वा न हुआ

इश्क़ दरिया है कोई जिस का किनारा न हुआ
नाख़ुदा कोई नहीं कोई सफ़ीना न हुआ

कैसे एहसास हो महरूमी-ए-क़िस्मत का उसे
लज़्ज़त-ए-दर्द से जो दिल से शनासा न हुआ

हाथ उठाए जो दुआ को तो तुझे ही माँगा
ये तो अल्लाह से सौदा हुआ सज्दा न हुआ

क्यों न अंजाम-ए-तमन्ना से सँवर जाए दिल
इश्क़ की राह में कब ख़ून-ए-तमन्ना न हुआ

एक वो हैं जो तेरी याद में रो लेते हैं
हम को अश्कों का भी इस ग़म में सहारा न हुआ

बे-रुख़ी का है गिला क्यों तुझे दिलबर से 'हबीब'
प्यार करने का तुझे ख़ुद ही सलीक़ा न हुआ